नाड़ी दोष: कारण, प्रभाव, अपवाद एवं निवारण के सटीक उपाय
नाड़ी दोष क्या होता है? आदि, मध्य और अंत्य नाड़ी दोष के लक्षण, संतान और स्वास्थ्य पर प्रभाव एवं नाड़ी दोष निवारण के अचूक शास्त्रीय उपाय।
अष्टकूट मिलान में नाड़ी कूट को सबसे अधिक 8 अंक दिए गए हैं। यदि वर और वधू दोनों की नाड़ी एक ही हो (आदि-आदि, मध्य-मध्य, या अंत्य-अंत्य), तो इसे नाड़ी दोष (Nadi Dosha) माना जाता है। महर्षि पराशर के अनुसार नाड़ी दोष संतान सुख और स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
नाड़ी दोष के तीन प्रकार और आयुर्वेद प्रकृति
- आदि नाड़ी दोष: वात प्रकृति से संबंधित, आनुवंशिक ऊर्जा असंतुलन।
- मध्य नाड़ी दोष: पित्त प्रकृति से संबंधित, पाचन एवं रक्त संबंधी सामंजस्य।
- अंत्य नाड़ी दोष: कफ प्रकृति से संबंधित, श्वास एवं प्रतिरक्षा क्षमता।
नाड़ी दोष के शास्त्रीय अपवाद (Cancellation Rules)
यदि वर और वधू की राशि एक हो परंतु नक्षत्र भिन्न हों, अथवा नक्षत्र एक हो परंतु चरण भिन्न हों, तो नाड़ी दोष स्वतः समाप्त (Cancel) हो जाता है। VivahDrishti का सिस्टम आपकी कुंडलियों में इन अपवादों का स्वतः परीक्षण करता है।
नाड़ी दोष होने पर महामृत्युंजय मंत्र का जाप, स्वर्ण दान एवं नाड़ी दोष शांति पूजा से इसका निवारण किया जाता है। साथ ही 36 गुण मिलान तथा भकूट दोष का संपूर्ण मूल्यांकन करें।
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