अष्टकूट मिलान: 8 कूटों का सम्पूर्ण शास्त्रीय विश्लेषण

अष्टकूट मिलान क्या है? जानें वैदिक ज्योतिष में 8 कूटों (वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री, गण, भकूट, नाड़ी) की प्रामाणिक शास्त्रीय गणना।

📅 अद्यतन: 31 जुलाई 2026 | अंतिम समीक्षा: 31 जुलाई 2026 👁️ अंतिम समीक्षा: 31 जुलाई 2026 | VivahDrishti Research Team

उत्तर भारतीय वैदिक ज्योतिष परंपरा में विवाह मिलान के लिए अष्टकूट (8 कूट) मिलान प्रणाली सबसे प्रामाणिक विधि मानी जाती है। इसमें वर और वधू की जन्म कुंडली में चंद्रमा के नक्षत्र एवं चंद्र राशि के आधार पर 8 मुख्य आयामों की जाँच की जाती है। VivahDrishti का गणना इंजन स्विस एफेमेरिस डेटाबेस के आधार पर इन 8 कूटों का विश्लेषण उच्च सटीकता से पूरा करता है।

8 कूटों का भारांश और महत्व

अष्टकूट मिलान में प्रत्येक कूट का एक निश्चित अंक (Weightage) होता है, जिसका कुल योग 36 अंक होता है।

  • वर्ण (1 अंक): वैचारिक और कार्यक्षेत्र सामंजस्य।
  • वश्य (2 अंक): आपसी आकर्षण और नियंत्रण क्षमता।
  • तारा (3 अंक): भाग्य, स्वास्थ्य और दीर्घायु।
  • योनि (4 अंक): शारीरिक और दांपत्य सुख।
  • ग्रह मैत्री (5 अंक): मानसिक मित्रता और वैचारिक समझ।
  • गण (6 अंक): स्वभाविक संतुलन (देव, मनुष्य, राक्षस गण)।
  • भकूट (7 अंक): पारिवारिक समृद्धि, प्रेम एवं संतान। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें भकूट दोष गाइड
  • नाड़ी (8 अंक): वंश वृद्धि और आनुवंशिक स्वास्थ्य। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें नाड़ी दोष मार्गदर्शिका

अष्टकूट के अलावा विवाह के लिए मंगल दोष (मांगलिक दोष) का परीक्षण भी अनिवार्य है। अपनी विवाह अनुकूलता जांचने के लिए हमारे 36 गुण मिलान कैलकुलेटर का उपयोग करें।

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