मंगल दोष (मांगलिक दोष): पहचान, प्रभाव एवं निरस्तीकरण के उपाय

मंगल दोष (Manglik Dosh) की संपूर्ण जानकारी। 1, 4, 7, 8, 12 भावों में मंगल का प्रभाव, मंगल दोष निरस्तीकरण नियम एवं सिद्ध उपाय।

📅 अद्यतन: 31 जुलाई 2026 | अंतिम समीक्षा: 31 जुलाई 2026 👁️ अंतिम समीक्षा: 31 जुलाई 2026 | VivahDrishti Research Team

जन्म कुंडली के 1 (लग्न), 4, 7, 8, या 12वें भाव में मंगल ग्रह की उपस्थिति से मंगल दोष (Mangal Dosh) बनता है। इसे मांगलिक दोष भी कहा जाता है। फलदीपिका और जातक पारिजात के अनुसार मंगल का प्रभाव जीवनसाथी के स्वास्थ्य और संबंध की स्थिरता पर पड़ता है।

मांगलिक दोष के प्रभाव और निरस्तीकरण (Cancellation) नियम

यदि वर और वधू दोनों की कुंडलियों में मंगल दोष हो, तो दोष स्वतः निरस्त (Cancel) हो जाता है। 28 वर्ष की आयु के पश्चात मंगल का उग्र प्रभाव स्वाभाविक रूप से कम हो जाता है। इसके अतिरिक्त मित्र ग्रहों (बृहस्पति, चंद्रमा) का दृष्टिक्षेप होने पर भी मंगल दोष का शमन होता है।

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