भकूट दोष: प्रकार, वैवाहिक प्रभाव, अपवाद एवं शांति उपाय
भकूट दोष क्या है? द्विर्द्वादश (2-12), नवपंचम (9-5), और षडाष्टक (6-8) भकूट दोष का वैवाहिक जीवन पर प्रभाव एवं शास्त्रीय उपाय जानें।
📅 अद्यतन: 31 जुलाई 2026 | अंतिम समीक्षा: 31 जुलाई 2026
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👁️ अंतिम समीक्षा: 31 जुलाई 2026 | VivahDrishti Research Team
अष्टकूट मिलान में भकूट कूट को 7 अंक प्राप्त हैं। यदि वर और वधू की चंद्र राशियाँ परस्पर 2-12, 9-5, या 6-8 की स्थिति में हों, तो भकूट दोष (Bhakoot Dosh) बनता है।
भकूट दोष के तीन मुख्य प्रकार
- षडाष्टक (6-8 भकूट): स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और वैचारिक मतभेद का कारक।
- द्विर्द्वादश (2-12 भकूट): आर्थिक व्यय, अनियोजित खर्चों और वित्तीय अस्थिरता का संकेत।
- नवपंचम (9-5 भकूट): संतान प्राप्ति में विलंब एवं भावनात्मक खिंचाव।
यदि दोनों चंद्र राशियों का स्वामी एक ही ग्रह हो (जैसे मेष और वृश्चिक का स्वामी मंगल), तो भकूट दोष का प्रभाव समाप्त हो जाता है। भकूट के साथ-साथ नाड़ी दोष एवं 36 गुण मिलान का परीक्षण भी आवश्यक है।
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